अन्तरिक्ष यान छोड़ने पर उलटी गिनती क्यों की जाती है?

आप सभी जानते होंगे की जब हम साईकिल की सवारी करते है तो सवारी करने से पहले अच्छी तरह उसकी जाँच-पड़ताल करते है कि उसमे हवा, ब्रेक आदि ठीक है या नहीं | ठीक इसी तरह अन्तरिक्ष यान को भी अन्तरिक्ष में छोड़ने से पहले रोकेट के सभी कल-पुरजो की जाँच की जाती है और जांच करना भी आवश्यक होता है ताकि उड़ान भरने में किसी तरह की कोई परेशानी ना आये |

अन्तरिक्ष उड़ान में अरबो-खरबों रूपये के उपकरण लगे होते है अगर उसमे बाल बराबर जरा सी खराबी होती है तो उस खराबी के कारन पूरी उड़न स्वाहा हो सकती है, जिससे भरी हानि हो सकती है | इसलिए अन्तरिक्ष यान छोड़ने के लिए रोकेट सीडी दर सीडी प्रक्रम में बनाये जाते है अर्थात राकेट का एक प्रक्रम दुसरे प्रक्रम से एक एक करके सहयोजित होता है |

इसलिए रोकेट को छोड़ने से पहले सभी प्रक्रमो की एक एक करके जाँच की जाती है ताकि उसमे किसी भी प्रकार की कोई खराबी ना हो |इसलिए पहले सभी प्रक्रम को जांचा-परखा जाता है | अगर कही भी किसी प्रक्रम में कोई खराबी नजर आती है तो सबसे पहले उसकी मरम्मत की जाती है और उस प्रक्रम के ठीक होने पर ही आगे के प्रक्रम की जाँच शुरू की जाती है | और इसी तरह पुरे रोकेट के सभी प्रक्रम को एक-एक करके जांचा जाता है |

यह क्रिया एक से प्रारंभ होकर दो, तीन, चार की और भी बढाकर पूरी की जा सकती थी, लेकिन इस अवस्था में हमे पूरी जाँच की सही स्थिति मालूम नहीं पड़ती | इसलिए नीचे से उपर के बजाये ऊपर से नीचे की और जाँच की जाती है | इसका लाभ यह होता है कि जब प्रक्रमो को जांचते-जांचते शून्य पर आते है तो पूरी तरह विश्वास हो जाता है कि सभी प्रक्रम ठीक है और सभी की जांच ठीक तरीके से हो चुकी है | इसलिए अन्तरिक्ष यान उड़ाते समय उलटी गिनती प्रारम्भ की जाती है और शून्य पर आते ही रोकेट को उड़ा दिया जाता है |

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