कोलेस्ट्रोल की अधिक मात्रा हानिकारक क्यों होती है?

HighCholesterol

कॉलेस्ट्रोल एक आवश्यक वसीय पदार्थ है, जो मनुष्यों और जानवरों के शरीर में निर्मित होता है | इससे बाईल अम्ल और कुछ हार्मोन निर्मित होते है, लेकिन एक स्तर के बाद इसकी मात्रा का बढ़ना हानिकारक हो जाता है | दरअसल वसा और कोलेस्ट्राल दोनों मिलकर धमनियों की आन्तरिक दीवारो पर जमा हो जाते है | इससे ये धमनिया सख्त हो जाती है और रक्त के बहावमें उनका रास्ता संकुचित हो जाता है | इस स्थिति को आर्टरी ओर्स्क्लेरोसिस arteriosclerosis कहते है |

रक्त के जमे हुए छोटे-छोटे थक्के, जो रक्त-वाहिनियो में से बहकर निकल जाते है, लेकिन अधिक कॉलेस्ट्रोल होने पर उनमे फंस भी जाते है | यदि यह स्थिति कोरोनरी धमनी में हो जाये, तो इसके परिणामस्वरुप दिल का दोरा भी पड़ सकता है |

कोरोनरी धमनिया रक्त को हृदय तक ले जाती है | ये बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योकि दिल को काम करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो की इन्ही धमनियों द्वारा प्रदान की जाती है | यदि विशेष भाग की कोरोनरी धमनियों में रूकावट आ जाए, तो हृदय का वह हिस्सा मृत बन जाता है यानि वह हिस्सा काम करना बंद कर देता है | इसी को दिल का दोरा कहते है, जो बहुत घातक होता है |

चिकनाईयुक्त भोज्य पदार्थो का सेवन कम से कम करके, ध्रुमपान का त्याग करके, और उचित व्यायाम करने से, कॉलेस्ट्रोल को धमनियों की दीवारों पर जमने से रोका जा सकता है | इससे हृदय रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है |

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