गुर्दे को शरीर की छलनी क्यों कहते है ?

जेसे आप सभी जानते है कि सभी रीढ़ वाले जीवो के शरीर में दो गुर्दे होते है | इन गुर्दों का मुख्य कार्य खून की गंदगी को शरीर से बाहर निकालना है | जितनी भी गंदगी खून में होती है ये उसको बाहर निकाल देते है और खून को साफ़ कर देते है|
इसके आलावा गुर्दे शरीर में जरुरत से ज्यादा पानी की मात्रा हो जाने पर उसे मूत्र के रूप में बाहर निकालते रहते है | इस प्रकार वह रक्त को अधिक गाढ़ा या पतला नहीं होने देते| इस प्रकार ये एक प्रकार की छलनी का काम करते है | यही नहीं ये खून में हर चीज़ की मात्रा का संतुलन भी बनाये रखते है |

कभी-कभी रक्त में चीनी, नमक और पानी की मात्रा अधिक हो जाती है, तो गुर्दे इन पदार्थो की अतिरिक्त मात्रा को शरीर से मूत्र के द्वारा बाहर निकाल देते है | शरीर की पाचन क्रिया और अन्य क्रियाओ के कारन शरीर में अमोनिया, यूरिक एसिड, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनता है | यह पदार्थ शरीर के लिए घातक होता है जेसे जहर हमारे शरीर के लिए घातक होता है | यह पदार्थ जब अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है तो इससे मनुष्यों की मृत्यु भी हो सकती है | इसलिए गुर्दे शरीर की इस गंदगी को मूत्र के रूप में निकालते रहते है और शरीर को स्वस्थ रखते है |

प्रत्येक गुर्दे में दस लाख के करीब नलिया होती है | हृदय से आया हुआ रक्त इन नलियों से होकर बहता है | ये नलिया छाल्लियो की तरह काम करती है | करीब १८५० लीटर खून प्रतिदिन गुर्दों से होकर बहता है | इसमें से छानी गयी गंदगी गुर्दों में से मूत्राशय थेली में जाती है | थेली के भरने पर मूत्र के साथ यह गंदगी भी बाहर निकल जाती है | इसलिए गुर्दे को शरीर की छलनी कहते है|

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