मुंगफलियों को रेत में क्यों भुना जाता है ?

आप सभी ने देखा होगा की मूंगफली वाला मूंगफलियो को रेत में भुनता है | क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश कि है की वो ऐसा क्यों करता है ?

आईये जानते है– किसी भी चीज को भूनने के लिए उसे चारो तरफ से ऊष्मा देनी पड़ती है, नहीं तो जिस तरफ ज्यादा ऊष्मा लगेगी उस तरफ का भाग जल जायेगा | और जिस तरफ ऊष्मा नहीं लगेगी उस तरफ कच्चा रह जायेगा | यह बात सभी चीजो पर लागु होती है जेसे तलने, भूनने, सेंकने आदि |

रेत की विशेषता यह है कि इसे गरम करने पर यह बहुत जल्दी गरम हो जाती है, इसे पर्याप्त ऊष्मा पर गरम किया जाता है | और इसमें उष्मा बहुत देर तक समान रुप से बनी रहती है | इसलिए जब गरम बालू में मुंगफलिया भूनते है तो एक जैसी ऊष्मा पर चारो तरफ से अच्छी तरह भुन जाती है | अगर उन्हें सीधे ही कडाही में डालकर तो भूनेंगे वे ठीक ढंग से नहीं भुन पाएंगी और कच्ची-पक्की रह जाएँगी और खाने में भी अच्छी नहीं लगेंगी | इसीलिए मूंगफली या काले चनो को गरम बालू में भुना जाता है |

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