12th history chapter 1 notes

 

पुरातत्वविद हड़प्पाई समाज में सामाजिकआर्थिक भिन्नताओं का पता किस प्रकार लगाते है? वे कौनसी भिन्नताओं पर ध्यान देते है ?
haddapai samaj me samajik arthik bhinnta ka pata kis prakar lagaate hai ?

उत्तर: विशेषज्ञ वैज्ञानिको की मदद लेकर लोगों की शारीरिक रचना के बारे में जानकारी हासिल करके लिंग तथा शारीरिक रचना आदि को जानते थे l हड़प्पाई समाज में सामाजिकआर्थिक भिन्नताओ का पता लगाने के लिय जीव वैज्ञानिकों की मदद से मानव प्रजाति और पशुपक्षियों के बारे में अध्यन करते है l
पुरातत्वविद निम्नलिखित भिन्नताओं पर ध्यान देते थे l
(a)
शारीरिक बनावट
(b)
सामाजिक स्थिति
(c)
विभिन्न लोगों की विभिन्न आर्थिक स्तिथि
(d)
विभिन्न लोगों के जरिये प्रयोग किये जाने वाले भिन्नभिन्न व्यवसाए और यातायात के साधन
(e)
खान पान तथा मनोरंजन के साधनों में भिन्नता और धार्मिक परम्पराओं या रीतिरिवाजों की भिन्नता



क्या आप इस तथ्य से सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकासी प्रणाली नगरयोजना की ओर संकेत करती है ? अपने उत्तर के कारण बताओ l

मनके बनाने के लिय प्रयुक्त पदार्थों की सूचि बनाइए l मनका बनाने की प्रक्रिया बताइए l

hadappa sehar ki jal nikasi yojna. Manke banane ke liye prayukt padard. Manke banane ki prakriya.

उत्तर: हाँ, हम इस तथ्य से सहमत हैं कि हड़प्पा के शहरों की जल निकासी प्राणली नगर योजना की ओर संकेत करती है l
कारण:
नालों का निर्माण:
1.
हड़प्पाई शहरों की सबसे अनूठी विशिष्टता है l यह स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि सिन्धुवासी नियोजित जल निकासी प्रणाली को अपनाए हुए थे l
2.
शहरों के नक्शों को देखने पर जान पड़ता है कि सड़कों और गलियों को लगभग एक ग्रिड, पध्दति से बनाया गया था और वह एकदुसरे को समकोण पर काटती थीं l
3.
शहरी बनावट को देखने से ऐसा जान पड़ता है कि पहले नियोजित ढंग से नालियों के साथसाथ गलियों को बनाया गया था और उनके निकट आवासों का निर्माण किया गया था l

मनके बनाने के लिए निम्न पदार्थों का उपयोग किया जाता था :
(a)
कानालियन (सुंदर लाल रंग का )
(b)
जैस्पर
(c)
स्फटिक
(d)
सेलखड़ी , तांबा, कांसा, सोने, जैसी धातुएँ
(e)
फ्यांस और पकी मिट्टी
मनके बनाने की प्रक्रिया:
1.
हड्प्पाई समाज में किये गये प्रयोगों से ये दर्शाया गया है कि कार्नीलियं का लाल रंग, पीले रंग के कच्चे माल तथा उत्पादन के विभिन्न चरणों में मनकों को आग में पकाकर प्राप्त किया जाता था l
2.
पत्थरों के पिण्डों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था , फिर बारीकी से शल्क निकल कर इन्हें अंतिम रूप दिया जाता था, पॉलिशऔर इनमें छेद करने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होती थी l

 

मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए l
mohanjodaro ki kuch vishishtao ka varnan kijiye .

उत्तर: मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताएँ निम्नलिखित थी :-
1.
मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का सबसे अनूठा नियोजित शहरी केंद्र था l यह सबसे प्रसिद्ध पूरास्थल है चाहे इसकी खोज हड़प्पा से बाद ही हुई थी l

2. मोहनजोदड़ो शहर को नियोकों ने दो भागों में विभाजित किया है एक भाग छोटा है और दूसरा भाग आधिक बड़ा और नीचे है | पहले शहर का नाम दुर्ग और दुसरे बड़े शहर का नाम निचला शहर रखा गया l

3. मोहनजोदड़ो का प्रथम भाग दुर्ग की ऊँचाई का कारण यह था की इसकी सरचना कचे ईंटो के चबूतरे पे बनाई गयी थी और इसे दीवारों से घेरा गया था ताकि इसे निचले शहर से अलग किया जा सके l

4. मोहनजोदड़ो का दूसरा भाग निचला शहर को भी दीवारों से घेरा गया था और मकानों को ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया था जो नींव का नाम रखते थे l

5. नीवों को बनाने में बहुत परिश्रम की जरूरत पड़ी होगी एक अनुमान लगाया जाता है की सिर्फ नीवों के आधार में ही चालीस लाख श्रमिकों की जरूरत पड़ती थी यदि एक मजदूर हर रोज एक घनीय मीटर मिट्टी ढोता होगा तब l
6.
मोहनजोदड़ो शहर का सम्पूरण भवननिर्माण कार्य चबूतरों पर एक निश्चित छेत्र तक सिमित था

7.
मोहनजोदड़ो शहर के नियोजन में इटें भी शामिल है जो भले ही धूप में सुखा कर या भट्टी पे पकाकर बनाई गयी हो जो की एक निश्चित अनुपात की होती थी जहाँ लम्बाई और चौड़ाई चार गुनी और उचाई दो गुनी होती थी इस तरह की इटें सभी हड्प्पाई शहरों में उपयोग की जाती थी l
8.
इन शहरों में सुनियोजित ढंग से नालों का निर्माण किया गया था जो की अपने आप में एक उदहारण है
|



पुरातत्वविद किस प्रकार अतीत का पुर्निर्माण करते हैं ? चर्चा कीजिये
puratatvvid kis prakar atit ka punarnirman karte hai ?

उत्तर: पुरातत्वविद प्राचीन स्थलों का उत्खनन करके विभिन्न वस्तुएँ प्राप्त करते हैं और विभिन्न वैज्ञानिकों की मदद से उनका अन्वेषण, व्याख्या और विश्लेषण करके कुछ निष्कर्ष निकालते है l
पुरातत्वविद निम्नलिखित तरीके से अतीत का पुनर्निर्माण करते है:
1.
पुरातत्व के वस्तुओं की पहचान एक विशेष प्रक्रिया के जरिये की जाती है l यहाँ एक महत्वपूर्ण हडप्पा स्थल मोहनजोदड़ों में हुए उत्खननों में अवतल चकियाँ बड़ी सख्यां में मिली और ऐसा प्रतीत होता है की अनाज पिसने का ये एक मात्र साधन था यें चकियाँ कठोर, कंकरीले, अग्निज अथवा बलुआ पत्थर से निर्मित थी जिन्हें मिट्टी में जमा कररखा जाता था ताकि इन्हें हिलने से रोका जा सके l
2.
दो मुख्या प्रकार की चक्कियां मिली है जिसमे पहेली चक्की में दो पत्थर को आपस में रगड़ा जाता था जिससे निचला पत्थर खोकला हो जाता था जिन्हें मसालों और जड़ी बूटी को पिसने में प्रयिग किया जाता था और दूसरी चक्की में केवल सालन या तरी बनाने में उपयोग किया जाता था
3.
नैकेने खोजी गई वस्तुओं की तुलना आजकल की चक्कियो से बनी l
4.
पुरातत्वविद सामाजिक तथा आर्थिक भिन्नताओं को जानने के लिय कई विधि का प्रयोग करते थे इन्हीं विधियौं में से एक शवाधानों का अध्यन करते थे जैसा की मिस्त्र के कई पिरामिडों में से कई पिरामिड राजकीय शावाधन थे l जहाँ बड़ी मात्र में धन दफनाया जाता था l
5.
ऐसीं पुरावस्तु का अध्यन जिन्ही पुरातत्वविद मोटे तौर पर भिन्नताओ को पहचानने में करते ते जो की एक अन्य विधि है l
6.
प्रस्तर पिण्ड, पुरे शंक, तथा ताँबा अयस्क जैसे कचा माल; ओजार; आपूर्ण वस्तुएँ ;त्याग दिया गया माल तथा कूड़ाकरकट जो की शिल्प कार्य के संकेतकों में से एक थे पुरातत्वविद श्लिपउत्पादन के केन्द्रों को पहचानने के लिए इनसब का प्रयोग करते थे l

हड्प्पाई समाज में शासकों के जरिये किये जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिये l

उत्तर: हड्प्पाई समाज में शासकों के जरिये बहुत से कार्य किये गए जिनमे से कुछ संभावित कार्यें है :-

A ) हड्प्पाई समाज में शासकों के जरिये जटिल फैसले लेने और उन्हें कर्याविन्ती जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जाते थेl वे इसके लिए एक साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहते है की हड्प्पाई पुरावस्तुओं में असाधारण एकरूपता को ही लें,जैसा की म्रिदामंडो, मुहरों, बाँटों तथा ईंटों से सपष्ट है l
B )
बस्तियों के निर्माण कार्य के बारे में निर्णय लेना, लाखों की संख्या में विभिन्न कार्यों के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करना जैसे महत्वपुर्ण और कठिन कार्य के निर्णय लेना शासकों का ही काम था |

C ) कुछ पुरात्वविद ये मानते है की हड्प्पाई समाज में शासक नही थी तथा सब सामाजिक स्थिथि सामान थी l परन्तु कुछ का मत था की यहाँ कई शासक थे जैसे मोहनजोदड़ो, हडप्पा के यहाँ अलगअलग शासक थे l कुछ मानना था की ये एक ही राज्य थे जैसा की पुरावस्तुओं में समानताओं, नियोजित बस्तियों के साक्ष्यों, ईटों के आकार में निश्चित आनुपात तथा बस्तियों के कच्चे माल के स्रोतों के समीप संस्थापित होने से स्पष्ट है|

D ) कुछ पुरात्वविद यह मानते है की सिन्धु घाटी की समकालीन सभ्यता मैसोपोटामिया के सामने हड्प्पाई लोगों में भी एक पुरोहित रजा होता था जो प्रसाद में रहता था l लोग उसे पत्थर की मूर्तियों में आकर देकर सम्मान करते थे हडप्पा सभ्यता की प्रथायें अभी भी समझी नही जा स्की और न ही ये जानने का साधन उपलब्ध है की क्या जो लोग इन अनुष्ठानों का निष्पादन करते थे उन्हीं के पास राजनैतिक सत्ता थी l
e)
सारे निर्णय शासक ही लेते थे उदहारण के लिए सार्वजनिक इमारतें, बस्ती की स्थापना का निर्णय , बड़ी संख्या में ईंटें को बनाना, शहरों में विशाल दीवारें, उनके नियोजन करने का कार्य, दुर्ग के निर्माण से पहेले चबूतरों का निर्माण कराना इत्यादि |


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