सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब बेटे भी घर छोड़ जाते हैं

Poem on Indian Army

सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब…
. . . . बेटे भी घर छोड़ जाते हैं. . . . .!

और वो बेटे फौजी कहलाते हैं…  !

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं…..!!

जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!

घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की होड़ में…वो भी कागज बन जाते हैं…

सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब…

. . . . बेटे भी घर छोड़ जाते हैं..!

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