चाणक्य की स्त्री नीति

आचार्य चाणक्य ने स्त्रियों के प्रति बहुत सारी सारगर्भित नीतिगत बाते कही है |

1 . इन 5 पर कभी विश्वास ना करें :
 नदियां,
 जिन व्यक्तियों के पास अश्त्र-शस्त्र हों,
 नाख़ून और सींग वाले पशु,
 औरतें (यहाँ ऐसी औरतो को संकेत किया गया है जो झूठे आरोप लगा कर लोगो को लूट लेती है )
 राज घरानो के लोगो पर।

 

2 . अगर हो सके तो विष मे से भी अमृत निकाल लें,
यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठाये, धोएं और अपनाये,
निचले कुल मे जन्म लेने वाले से भी सर्वोत्तम ज्ञान ग्रहण करें,
उसी तरह यदि कोई बदनाम घर की कन्या भी महान गुणो से संपनन है और आपको कोई सीख देती है तो गहण करे.

3. महिलाओं में पुरुषों कि अपेक्षा:
भूख दो गुनी
लज्जा चार गुनी ,
साहस छः गुना,
और काम आठ गुनी होती है।  

4. दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास साक्षात् मृत्यु के समान है।  

 



5 . कोयल की सुन्दरता उसके गायन मे है तो एक स्त्री की सुन्दरता उसके अपने परिवार के प्रति समर्पण मे है |
 एक बदसूरत आदमी की सुन्दरता उसके ज्ञान मे है तथा एक तपस्वी की सुन्दरता उसकी क्षमाशीलता मे है |

6. एक बेकार राज्य का राजा होने से यह बेहतर है की व्यक्ति किसी राज्य का राजा ना हो.
एक पापी का मित्र होने से बेहतर है की बिना मित्र का हो.
एक मुर्ख का गुरु होने से बेहतर है की बिना शिष्य वाला हो.
एक बुरीं पत्नी होने से बेहतर है की बिना पत्नी वाला हो |

7 .इन दोनों के मध्य से कभी ना जाए..
दो ब्राह्मण.
ब्राह्मण और उसके यज्ञ में जलने वाली अग्नि.
पति पत्नी.
स्वामी और उसका चाकर.
हल और बैल

8 . हाथी से हजार गज की दुरी रखे.
घोड़े से सौ की.
सिंग वाले जानवर से दस की.
लेकिन दुष्ट स्त्री और पुरुष जहाँ हो उस जगह से ही निकल जाए |

9. एक राजा की शक्ति उसकी शक्तिशाली भुजाओ में है
एक ब्राह्मण की शक्ति उसके ज्ञान में है |
एक स्त्री की शक्ति उसकी सुन्दरता, तारुण्य और मीठे वचनों में है |

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