Economics Important Notes Part-4

Q 30 : बचत फलन या बचत प्रवृत्ति से आप क्या समझते हैं ?
Ans : पीटरसन के अनुसार ,” बचत फलन या बचत प्रवृत्ति की परिभाषा एक अनुसूची के रूप में दी जा सकती है जो आय के विभिन्न स्तरों पर बचत की मात्रा को बताते हैं “|

बचत प्रवृत्ति दो प्रकार की होती है:-
i) औसत बचत प्रवृत्ति : औसत बचत प्रवृत्ति बचत और आय का अनुपात है

औसत बचत प्रवृत्ति= बचत/ आय
या
APS = S/Y

ii) सीमांत बचत प्रवृत्ति : सीमांत बचत प्रवृत्ति बचत में होने वाले परिवर्तन तथा आय में होने वाले परिवर्तन का अनुपात है |
सीमांत बचत प्रवृत्ति = बचत में परिवर्तन/ आय में परिवर्तन



 

Q 31 : अधिमांग या स्फीति से आप क्या समझते हैं और इसे निवेश के माध्यम से कैसे ठीक किया जा सकता है ?

Ans : जब अर्थव्यवस्था में आय का संतुलन स्टार निर्धारित होने से पहले रोजगार का स्तर प्राप्त हो जाता है तो इसे अतिपूर्ण रोजगार संतुलन कहते है इस स्थिति में पूर्ण रोजगार के स्तर पर कुल मांग, कुल पूर्ति से अधिक होती है जिसे अधिमांग कहा जाता है | AD तथा AS के बीच के अंतर को स्फितिक अंतराल भी कहा जाता है |

उपाय: किनस के अनुसार स्थिति या अधिमांग की स्थिति में सरकार विनिवेश कम करके स्थिति को ठीक कर सकती है तथा पूर्ण रोजगार स्तर प्राप्त कर सकती है |

 

 

Q 32 :स्फीति या अधिमांग को ठीक करने के लिए अपनाए जाने वाले मुद्रिक उपायों को समझाइए |

Ans : (A ) परिमाणात्मक उपाय (B) चयनात्मक उपाय

(A ) परिमाणात्मक उपाय
i) बैंक दर में वृद्धि: केंद्रीय बैंक द्वारा बैंक दर में वृद्धि कर दी जाती है जिससे वाणिज्यिक बैंक केंद्रीय बैंक से ऋण कम लेते हैं फलस्वरूप लोगों के पास ऋण कम पहुंचता है और लोगों की मांग करने की आय कम हो जाती हैं |

ii) खुले बाजार की क्रियाएं : स्फीति या अधिमांग की दशा में केंद्रीय बैंक अपनी प्रतिभूतियों जय किसान विकास पत्र को खुले बाजार में बेचते हैं जिससे लोगों की मांग करने वाली आए केंद्रीय बैंक के पास चली जाती है परिणाम स्वरूप उनकी प्रयोज्य आय कम हो जाती है और मांग में कमी आती है |

iii) CRR नकद आरक्षित अनुपात में वृद्धि: स्फीति की दशा में केंद्रीय बैंक नकद आरक्षित अनुपात में वृद्धि कर देता है जिससे वाणिज्यिक बैंक द्वारा दिए जाने वाले में कमी हो जाती है तथा लोगों की क्रय शक्ति घट जाती है |

iv) संवैधानिक तरलता अनुपात में वृद्धि: स्फीति या अधिमांग की दशा में केंद्रीय बैंक संवैधानिक तरलता अनुपात में वृद्धि कर देता है जिस कारण वाणिज्यिक बैंक लोगों को कम ऋण दे पाता है जिससे लोगों की आय कम होती है फलस्वरूप मांग में भी कमी आ जाती है |

(B) चयनात्मक उपाय:
i)सीमांत आवश्यकताओं में वृद्धि: बैंक अधिमांग की दशा में सीमांत आवश्यकता में वृद्धि कर देते हैं जिससे लोगों के ऋण कम हो जाते हैं और उनकी क्रय शक्ति में कमी आती है फलस्वरूप मांग कमी हो जाती है |

ii) साख की राशनिंग: केंद्रीय बैंक द्वारा आदेश दिया जाता है कि वह केवल कुछ विशेष अवसरों जैसे उत्पादन संबंधी क्रियाओं पर ऋण दें तथा उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के लिए ऋण नहीं दे इससे लोगों के पास ऋण नहीं पहुंच पाता और उनकी क्रय शक्ति कम हो जाती है|

iii) प्रत्यक्ष कार्यवाही : वाणिज्यिक बैंक द्वारा आदेश नहीं मानने पर केंद्रीय बैंक सभी शक्तियां वाणिज्यिक बैंक से छीन लेता है तथा साख की राशनिंग करता है इससे मांग में कमी आती है |

 

Q 33 : मुद्रा स्फीति या कीमत से आप क्या समझते हैं उसे ठीक करने के लिए अपनाए जाने वाले राजकोषीय उपाय बताइए |

Ans : सरकार की आय वह ऋण और बचत से संबंधित नीति को सरकार की राजकोषीय नीति कहते हैं | मुद्रा स्फीति को ठीक करने के लिए राजकोषीय उपाय निम्नलिखित है :-

i) जनता से ऋण : अधिमांग की दशा में सरकार जनता से कर्जा ले लेती है जिससे जनता के पास मांग करने की आय कम बचती है |

ii) करो में वृद्धि : अधिक डिमांड की स्थिति में सरकार करो कि दर में वृद्धि कर सकती है या नए कर लगा सकती है जिसे जनता के पास प्रयोज्य आय कम रह जाती है और परिणाम स्वरूप अधिमांग ठीक होती है |

 

Q 34 : अभावी मांग या अवस्फीति को ठीक करने के लिए अपनाए जाने वाले तीन राजकोषीय उपाय बताइए |
Ans : अभावी मांग को ठीक करने के लिए अपनाए जाने वाले राजकोषीय उपाय निम्नलिखित है :-
i) सार्वजनिक व्यय में वृद्धि : अभावी मांग की स्थिति में सरकार सार्वजनिक व्यय में वृद्धि कर देती है अर्थात पुल निर्माण सड़क निर्माण इत्यादि में क्या जाने वाला व्यय में वृद्धि कर देती है जिससे लोगों के पास अधिक आय पहुंचती है और परिणाम स्वरुप वे मांग करते हैं |

ii) जनता को ऋण वापसी : अवस्फीति की दशा में सरकार जनता से लिए गए ऋण को वापस करती है जिसे जनता के पास मांग करने की आय अधिक हो जाती है |

iii) करो में कमी : अभावी या अवस्फीति किस दिशा में सरकार करो कि दर में या तो कमी कर देती है या कई प्रकार के कर समाप्त कर देती है जिससे जनता के पास प्रयोज्य आय अधिक हो जाती है और परिणाम स्वरूप अभावी मांग ठीक हो जाती है |

 



Q 35 : मुद्रा को परिभाषित कीजिए तथा इसके कार्य को बताइए |
Ans : मुद्रा शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द मौनेदा से हुई है प्रोफेसर क्रोउधर के अनुसार कोई भी चीज जो सामान्यतः विनिमय के साधन के रूप में स्वीकार कर ली जाती है और साथ ही मूल्य के मापन और संचय का कार्य करती है मुद्रा के रूप में परिभाषित की जाती है |

मुद्रा के निम्नलिखित कार्य हैं:
i) विनिमय का साधन: यह मुद्रा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य है मुद्रा में सर्वग्रहीता का गुण है | इसलिए कोई भी व्यक्ति अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है तथा मुद्रा के द्वारा अपनी आवश्यकताओं की वस्तु खरीद सकता है |

ii) मूल्य का मापन : यह मुद्रा का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य है मुद्रा वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को माप सकती है | इससे उनका सापेक्षिक मूल्य निर्धारित करना सरल हो जाता है |

मुद्रा का द्वितीय कार्य: इन्हें मुद्रा के साया किया व्युत्पन्न कार्य भी कहा जाता है यह निम्नलिखित हैं:
i) संचय का आधार: मुद्रा के रूप में संपत्ति का संग्रह करना काफी सरल है क्योंकि मुद्रा में अन्य परिसंपत्ति की तुलना में अधिक तरलता होती है |

ii) मूल्य का स्थानांतरण ; मुद्रा की सहायता से मूल्य को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना काफी सरल होता है |

iii) स्थगित भुगतानो का आधार : मुद्रा वर्तमान मूल्य को भावी मूल्यों से जोड़ती है तथा उधार लेने और देने को सरल बनाती है | मुद्रा के कारण ही शेयर, ऋण पत्र, आदि प्रतिभूतियों को खरीदना और बेचना संभव हो जाता है |

 

Q 36 : मुद्रा पूर्ति क्या होती है ? आदर्श मुद्रा पूर्ति से आप क्या समझते हैं ?
Ans :
मुद्रा पूर्ति : मुद्रा की पूर्ति एक स्टाक अवधारणा है इससे अभिप्राय एक निश्चित समय पर देश के लोगों के पास कुल मुद्रा के स्टॉक से है |

आदर्श मुद्रा पूर्ति: मुद्रा की पूर्ति कुल व्यय पर अपना प्रभाव डालती है | आदर्श मुद्रा पूर्ति वह है जो
उत्पादन , राष्ट्रीय आय तथा रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं |
यदि मुद्रा की पूर्ति इस आदर्श मात्रा से अधिक होगी तो अर्थव्यवस्था में स्थिति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी | अर्थात वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें बढ़ेंगी तथा मुद्रा की अपनी कीमत याने की क्रय शक्ति कम हो जाएगी |
इसके विपरीत मुद्रा की पूर्ति मात्रा से कम है तो अवस्फीति की दशा उत्पन्न होगी और उत्पादन तथा रोजगार घटने लगेंगे |

 

 

Q 37 : मुद्रा पूर्ति के विभिन्न संघटको को बताइए ?
Ans : i) सिक्के : एक देश में सिखों का निर्गमन वहां का केंद्रीय बैंक सरकार के सहयोग से करता है | सिक्कों की ढलाई का कार्य सरकारी टकसाल में क्या जाता है और उन पर अंकित मूल्य उनके धातु मूल्य से अधिक होता है |

ii) करंसी नोट : यह मुद्रा की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण अंग है | प्रत्येक देश में सरकार तथा केंद्रीय बैंक के नोट निर्मित करने का अधिकार रखते हैं भारत में 1 रुपए का नोट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय तथा अन्य नोट केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं |

iii) मांग जमाए : मांग की जमाए मुद्रा की पूर्ति का अति महत्वपूर्ण घटक है | इसके अंतर्गत केवल जमाए ही मुद्रा कहलाती हैं | चेक मुद्रा नहीं कहलाते | जनता अपनी बचत को बैंक में जमा करती है इसे ही मांग जमाए कहते हैं |
iv) आदेश मुद्रा वह मुद्रा होती है जो सरकार के आदेश से चलती है इसमें नोट तथा सिक्के सम्मिलित होते हैं

v) न्यास मुद्रा : यह मुद्रा है जो प्राप्त करता तथा अदा करता के बीच परस्पर विश्वास पर आधारित होती है सरकार के आदेश पर नहीं जैसे चेक एक न्यास मुद्रा है|

 

 

Q38 : वाणिज्यिक बैंक किसे कहते हैं ? इसके क्या कार्य हैं ?

Ans : वाणिज्यिक बैंक या व्यापारिक बैंक वह वित्तीय संस्था है जो लोगों के रुपए को अपने पास जमा के रूप में स्वीकार करती है और उनको उपभोग अथवा निवेश के लिए उधार देती है |

वाणिज्यिक बैंकों के कार्य:
i) जमा स्वीकार करना : बैंक लोगों की जमाओ को स्वीकार करता है लोग अपनी सुविधा और शक्ति के अनुसार निम्नलिखित खातों में रुपए जमा कर सकते हैं

a) सावधि जमा खाता: इस खाते में एक निश्चित अवधि के लिए रुपया को जमा किया जाता है यदि जमाकर्ता को अपनी रकम की आवश्यकता अवधि पूर्ण से पहले पड़ जाती है तो बैंक कुछ कटौती या ब्याज काट कर बैंक उन्हें रकम लौटा देता है |
b) चालू जमा खाता: इस खाते में अधिकतर व्यापारी वर्ग रुपया जमा करवाता है | अधिकतर बैंक किस प्रकार की जमा पर ब्याज नहीं देता | यदि जमा की रकम एक न्यूनतम आवश्यक रांची से कम होती है तो जमा करता से बैंक कोची सेवा शुल्क वसूल कर सकता है |

c) बचत जमा खाता : यह खाता छोटी-छोटी बचतो के लिए होता है इस खाते से एक निश्चित मात्रा तक ही रुपया निकलवाया जा सकता है

ii) ऋण देना : बैंकों का दूसरा मुख्य कारण लोगों को रुपया उधार देना होता है | बैंक लोगों को उपभोग के लिए तथा व्यापारी वर्ग को उत्पादन के लिए ऋण देता है |

iii) एजेंसी का कार्य : बैंक अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न तरीकों से एजेंट के कार्य करता है जैसे की विभिन्न मदों का एकत्रीकरण तथा भुगतान | बैंक अपने ग्राहकों की ओर से चेक किराया ब्याज इत्यादि को इकट्ठा करता है और इसी प्रकार उनकी ओर से करो को , बीमा की किस्त आदि की अदायगी भी करता है |

iv) प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री : बैंक अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त करके उनकी ओर से प्रतिभूतियों को खरीदने बेचने का सुरक्षित रखने का कार्य करता है |

v) ट्रस्टी तथा प्रबंधक : बैंक अपने ग्राहकों के आदेश पर उनकी संपत्ति के ट्रस्टी तथा प्रबंधक का कार्य भी करता है |
vi) विदेशी मुद्रा का क्रय विक्रय: बैंक विदेशी मुद्रा का क्रय विक्रय कर के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देते हैं अधिकतर यह कार्य विदेशी बैंकों द्वारा किया जाता है |

vii) लॉकर की सुविधा : बैंक ग्राहकों को सोने-चांदी के जेब अन्य आवश्यक कागजात सुरक्षित रखने के लिए लॉकर की सुविधा प्रदान करता है इसका वार्षिक किराया बहुत कम होता है |

 

Q 39: साख गुणक से आपका क्या अभिप्राय है ?
Ans: साख गुणक से यह ज्ञात होता है कि एक बैंक कितनी मात्रा में और कितना साख सृजन कर सकता है |

 

 

Q 40 : केंद्रीय बैंक से आप क्या समझते हैं ? इसके क्या कार्य हैं ?
ANS : किसी भी देश का वह बैंक जो पूरी बैंकिंग व्यवस्था का नियंत्रण करता है तथा जिसको मुद्रा के निर्गमन का अधिकार प्राप्त होता है केंद्रीय बैंक कहलाता है | केवल 1 का नोट केंद्रीय बैंक नहीं सकता इसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है | किसी भी देश में एक केंद्रीय बैंक होता है केवल अमेरिका जैसे कोई देश इसका अपवाद है जहां दो केंद्रीय बैंक है |
केंद्रीय बैंक के कार्य ;

i) सरकारी का वित्त सलाहकार : देश का सर्वोच्च बैंक होने के कारण यह सरकार के आर्थिक एवं मौद्रिक विषयों पर समय-समय पर सलाह देता रहता है |

ii) सरकारी संपत्ति का रखवाला : केंद्रीय बैंक सरकारी विभागों के खाते रखता है तो सरकारी कोषों की व्यवस्था करता है | यह सरकार के लिए उसी प्रकार का कार्य करता है जिस प्रकार एक वाणिज्यिक बैंक अपने ग्राहकों के लिए करते हैं |

iii) विदेशी मुद्रा का संरक्षण : केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा को संचित करता है तथा संरक्षक के रूप में कार्य करता है | इसके अतिरिक्त केंद्रीय बैंक अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विकास तथा विनिमय दर की स्थिरता के लिए विदेशी कोषों को उचित मात्रा में बनाए रखाता है |

iv) समाशोधन गृह का कार्य : केंद्रीय बैंक समाशोधन गृह का कार्य करता है | हर वाणिज्यिक बैंक का केंद्रीय बैंक में खाता होता है इसलिए इन बैंकों के पास एक दूसरे के चेक आते हैं उनका भुगतान केंद्रीय बैंक समाशोधन करके करता है |

v) साख नियंत्रण: केंद्रीय बैंक स्फीति की दशा में अधिमांग को ठीक करने के लिए परिमाणात्मक तथा गुणात्मक उपाय अपनाता है |

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