Economics Important Notes Part-3

Q 21 : तृतीयक क्षेत्र को समझाते हुए इसके उपक्षेत्रों के नाम लिखो
तृतीयक क्षेत्र : क्षेत्रों जिनमें सेवाओं का उत्पादन किया जाता है जैसे बैंकिंग बीमा परिवहन व्यापार आदि उन्हें तृतीयक क्षेत्र कहते हैं | तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र भी कहते हैं | इसके निम्नलिखित उपक्षेत्र हैं :-
बैंकिंग तथा बीमा
संचार तथा परिवहन
होटल व्यापार तथा जलपान गृह
स्थिर संपदा तथा निजी आवास का स्वामित्व
प्रतिरक्षा तथा प्रशासन
अन्य सेवाएं

Q 22 : भारत में राष्ट्रीय आय की गणना करते समय किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?

Ans : भारत में राष्ट्रीय आय की गणना करते समय निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है :-

i) दोहरी गणना की समस्या: उत्पाद विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना करने में एक महत्वपूर्ण समस्या दोहरी गणना की है | दोहरी गणना से अभिप्राय है एक वस्तु के मूल्य की एक से अधिक बार करना करना | प्रत्येक उत्पादक जो वस्तु बनाता है उसे अंतिम वस्तु मानता है | संगणक भी अनेक बार मध्यवर्ती वस्तु को अंतिम गुमान कर एक से अधिक बार गणना कर लेते हैं जिससे राष्ट्रीय आय में अनावश्यक रूप से वृद्धि होती है |

ii) अवधारणा की कठिनाई: राष्ट्रीय आय ज्ञात करने की 3 विधियां हैं आय विधि , उत्पाद विधि , व्यय विधि इसमें यह समस्या उत्पन्न होती है कि किस विधि को प्रयोग में लाया जाए |

iii) अधूरी जानकारी : भारत में अनेक लोग अशिक्षित होने के कारण अपनी आय का लेखांकन नहीं करते अनेक लोग कर से बचने के लिए अपने आय के सही आंकड़े प्रस्तुत नहीं करते जिसके कारण राष्ट्रीय आय का अनुमान अशुद्ध हो जाता है |

iv) अमौद्रिक क्षेत्र : भारत में आज भी अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुद्रा का प्रचलन नहीं होता है इस कारण इन क्षेत्रों के लेनदेन राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किए जाते हैं |

v) कुशल संगणको का अभाव : भारत में राष्ट्रीय आय की गणना करने वाले कुशल संगणको का अभाव है | जो लोग राष्ट्रीय आय की गणना करते हैं उन्हें इससे संबंधित कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता जिसके कारण वह सही आंकड़े प्रस्तुत करने में असमर्थ रहते हैं |

Q 23 : निजी आय राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट करो ?
Ans :
i) राष्ट्रीय आय में अर्थव्यवस्था के सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र दोनों की आय को शामिल किया जाता है इसके विपरीत निजी आय में केवल निजी क्षेत्र की आय शामिल की जाती है |

ii) राष्ट्रीय आय में केवल कारक आय शामिल की जाती है इसमें किसी भी प्रकार के हस्तांतरण भुगतान शामिल नहीं किए जाते हैं | जबकि निजी आय में कारक आय तथा सरकार से प्राप्त निबल वर्तमान हस्तांतरण शामिल किए जाते हैं |

iii) राष्ट्रीय आय में राष्ट्रीय ऋण पर दिए गए बयाज को शामिल नहीं किया जाता परंतु निजी आय में राष्ट्रीय ऋण पर दिए गए ब्याज को शामिल किया जाता है |



Q 24 : निजी आय की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए |

Ans : निजी आय वह आय हैं जो निजी क्षेत्र को सभी स्रोतों से प्राप्त होने वाले कारक आय तथा सरकार से प्राप्त वर्तमान हस्तांतरण और शेष विश्व से प्राप्त वर्तमान हस्तांतरण का जोड़ है |

Q 25 : वैयक्तिक आय तथा व्यक्ति प्रयोज्य आय की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए अंतर स्पष्ट कीजिए |
Ans :
वैयक्तिक आय : व्यक्तियों तथा परिवारों द्वारा सभी स्त्रोतों से प्राप्त वास्तविक आय तथा वर्तमान हस्तांतरण का जोड़ वैयक्तिक आय कहलाता है |

वैयक्तिक प्रयोज्य आय : यह वह आय हैं जो व्यक्तियों को सभी स्त्रोतों से प्राप्त होती है तथा उनके पास सरकार द्वारा उनकी आय तथा संपत्ति पर लगाए गए सभी प्रकार के करों का भुगतान करने के बाद बचती है |

वैयक्तिक प्रयोज्य आय तथा वैयक्तिक आय में अंतर :-

वैयक्तिक आय की अवधारणा प्रयोज्य आय की अवधारणा से अधिक व्यापक है | निजी आय में से निगमों के वितरित लाभ और निगम कर को घटाकर वैयक्तिक आय का अनुमान लगाया जा सकता है |
इसके विपरीत वैयक्तिक प्रयोज्य आय वह आय हैं जो सभी प्रकार के प्रत्यक्ष करो जैसे आयकर और गृह कर तथा सरकारी प्रशासनिक विभागों की विविध प्राप्तियो का भुगतान फीस और जुर्माने के रूप में करने के पश्चात लोगों के पास बचती है |

Q 26 : हरित राष्ट्रीय उत्पाद से आप क्या समझते हैं ? इसकी गणना कैसे की जाती है ?
Ans. आधुनिक अर्थशास्त्री आर्थिक और सामाजिक कल्याण के सूचक के रूप में राष्ट्रीय आय के स्थान पर हरित राष्ट्रीय आय का उपयोग करते हैं | हरित राष्ट्रीय आय वह आय हैं जो राष्ट्रीय आय में से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले पदार्थों को हटाकर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले तत्वो को जोड़कर प्राप्त होती है | इसकी गणना के लिए प्रदूषण आदि तत्वों को घटा दिया जाता है तथा उन तत्व को जोड़ दिया जाता है जो पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं |

हरित राष्ट्रीय आय = राष्ट्रीय आय – नकारात्मक तत्व का मूल्य + सकारात्मक तत्व का मूल्य

Q 27 : राष्ट्रीय आय एवं कल्याण के संबंध को स्पष्ट करते हुए बतलाइए कि क्या GNP कल्याण का उचित रूप में मापन करता है ?
Ans : राष्ट्रीय आय एवं कल्याण का आपस में घनिष्ठ संबंध है क्योंकि यह माना जाता है कि जब राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है तो लोगों के कल्याण में भी वृद्धि होती है परंतु इसके कुछ सशक्त अपवाद भी हैं :-

i) राष्ट्रीय आय का वितरण: यदि NDPfc मैं वृद्धि हो रही है तो इसे पूर्णत: सही माना जा सकता है कि प्रत्येक व्यक्ति को इसका लाभ पहुंचे जाता है, परंतु अधिकांश NNPfc कुछ लोगों तक सीमित रह जाती है इस प्रकार से कल्याण नहीं माना जाएगा |

ii) बाल श्रम : राष्ट्रीय आय में श्रम के साथ बाल श्रम भी जोड़ लिया जाता है जिससे राष्ट्रीय आय तो बढ़ती है परंतु कल्याण नहीं होता क्योंकि बाल श्रम कानून माननीय नहीं है

iii) नशीली दवाओं की बिक्री: कई बार नशीले पदार्थों की बिक्री को उत्पादन में जोड़ दिया जाता है इससे भी राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है परंतु यह एक अपराध है तथा इससे समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है इस कारण यह कल्याण के विरुद्ध है |

GNP कल्याण का उचित रूप से मापन नहीं करता है इसके निम्नलिखित कारण हैं :
i) आय के वितरण की अनदेखी : यदि GNP के बढ़ने पर उसका वितरण समान और न्याय पूर्ण ढंग से नहीं हुआ है तो इससे कल्याण पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन जीएनपी इस पर कोई ध्यान नहीं देती |

ii) गैर बाजार का लेन-देन: गैर मौद्रिक या गैर बाजारी लेन-देन कल्याण पर काफी प्रभाव डालते हैं किंतु इन्हें जीएनपी में शामिल नहीं किया जाता जैसे ग्रहणी की सेवाएं |

iii) बहुत सी ऐसी वस्तु है हैं जो कल्याण पर बुरा प्रभाव डालती हैं किंतु वह जीएनपी के मूल्य को बढ़ाती हैं जैसे नशीली दवाओं का उत्पादन | इसके विपरीत कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जो कल्याण को बढ़ाती हैं परंतु जीएनपी में शामिल नहीं हो पाती जैसे वृक्षारोपण करना|

Q 28 : कुल मांग को परिभाषित करते हुए इसके सघटको के नाम लिखो ?
Ans : कुल मांग से आशय एक लेखा वर्ष में एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं पर किए जाने वाले कुल व्यय से है अर्थात कुल मांग , उपयोग मांग , तथा निवेश मांग का योग है |

इसके निम्नलिखित संघटक है :-
i) घरेलू उपभोग व्यय : राष्ट्रीय आय का वह भाग जिसे लोग अपनी आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए वस्तुओं और सेवाओं पर प्रत्यक्ष रूप से व्यय करते हैं उसे घरेलू क्षेत्र का उपभोग व्यय कहते हैं |

ii) सरकारी उपभोग व्यय : सरकार बहुत सी वस्तुओं और सेवाओं की मांग बहुत से कारणों से करती है जैसे कि सार्वजनिक के कार्य सड़क बनाना स्कूल बनाना स्वास्थ्य सुविधाएं देना इत्यादी | इत्यादि

iii) निवेश: राष्ट्रीय आय का वह भाग जिसमें पूंजीगत पदार्थों जैसे कि मकान , कारखाने , मशीनों आदि में वृद्धि के लिए खर्च किया जाता है निवेश कहलाता है |

iv) शुद्ध निर्यात : आयात तथा निर्यात का अंतर शुद्ध निर्यात कहलाता है |

Q 29 : कीन्स के अनुसार लोग अपने पास नगद रुपए क्यों रखना चाहते हैं ?

OR

किंन्स के अनुसार बचत और निवेश में असंतुलन के क्या कारण हैं ?

Ans : कीन्स के अनुसार लोग निम्नलिखित कारणों से अपने पास नगद रखना चाहते हैं:-
i) लेन-देन हेतु: प्रति व्यक्ति कुछ लेनदेन खर्च करता है इसके लिए वह अपने पास कुछ नकद राशि रखता है |

ii) सतर्कता उद्देश्य: कीन्स कहते हैं भविष्य अनिश्चित है भविष्य में होने वाली हानि या कोई आपदा का किसी को ज्ञान नहीं होता इसलिए इसी प्रकार की हानियों की पूर्ति करने के लिए मनुष्य कुछ धन भविष्य के लिए अपने पास रखता है |

iii) सट्टा उद्देश्य: कीन्स के अनुसार लोग जुए क्रिकेट मैच इत्यादि पर अपने मनोरंजन तथा लाभ के लिए सट्टा लगाते हैं जहां केवल नगद लेनदेन चलता है इसके लिए लोग कुछ राशि अपने पास रखते हैं |

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